Sunday, July 16, 2017

शिवजी के १०८ नाम

ॐ भोलेनाथ नमः
ॐ कैलाश पति नमः
ॐ भूतनाथ नमः
ॐ नंदराज नमः
ॐ नन्दी की सवारी नमः
ॐ ज्योतिलिंग नमः
ॐ महाकाल नमः
ॐ रुद्रनाथ नमः
ॐ भीमशंकर नमः
ॐ नटराज नमः
ॐ प्रलेयन्कार नमः
ॐ चंद्रमोली नमः
ॐ डमरूधारी नमः
ॐ चंद्रधारी नमः
ॐ मलिकार्जुन नमः
ॐ भीमेश्वर नमः
ॐ विषधारी नमः
ॐ बम भोले नमः
ॐ ओंकार स्वामी नमः
ॐ ओंकारेश्वर नमः
ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः
ॐ विश्वनाथ नमः
ॐ अनादिदेव नमः
ॐ उमापति नमः
ॐ गोरापति नमः
ॐ गणपिता नमः
ॐ भोले बाबा नमः
ॐ शिवजी नमः
ॐ शम्भु नमः
ॐ नीलकंठ नमः
ॐ महाकालेश्वर नमः
ॐ त्रिपुरारी नमः
ॐ त्रिलोकनाथ नमः
ॐ त्रिनेत्रधारी नमः
ॐ बर्फानी बाबा नमः
ॐ जगतपिता नमः
ॐ मृत्युन्जन नमः
ॐ नागधारी नमः
ॐ रामेश्वर नमः
ॐ लंकेश्वर नमः
ॐ अमरनाथ नमः
ॐ केदारनाथ नमः
ॐ मंगलेश्वर नमः
ॐ अर्धनारीश्वर नमः
ॐ नागार्जुन नमः
ॐ जटाधारी नमः
ॐ नीलेश्वर नमः
ॐ गलसर्पमाला नमः
ॐ दीनानाथ नमः
ॐ सोमनाथ नमः
ॐ जोगी नमः
ॐ भंडारी बाबा नमः
ॐ बमलेहरी नमः
ॐ गोरीशंकर नमः
ॐ शिवाकांत नमः
ॐ महेश्वराए नमः
ॐ महेश नमः
ॐ ओलोकानाथ नमः
ॐ आदिनाथ नमः
ॐ देवदेवेश्वर नमः
ॐ प्राणनाथ नमः
ॐ शिवम् नमः
ॐ महादानी नमः
ॐ शिवदानी नमः
ॐ संकटहारी नमः
ॐ महेश्वर नमः
ॐ रुंडमालाधारी नमः
ॐ जगपालनकर्ता नमः
ॐ पशुपति नमः
ॐ संगमेश्वर नमः
ॐ दक्षेश्वर नमः
ॐ घ्रेनश्वर नमः
ॐ मणिमहेश नमः
ॐ अनादी नमः
ॐ अमर नमः
ॐ आशुतोष महाराज नमः
ॐ विलवकेश्वर नमः
ॐ अचलेश्वर नमः
ॐ अभयंकर नमः
ॐ पातालेश्वर नमः
ॐ धूधेश्वर नमः
ॐ सर्पधारी नमः
ॐ त्रिलोकिनरेश नमः
ॐ हठ योगी नमः
ॐ विश्लेश्वर नमः
ॐ नागाधिराज नमः
ॐ सर्वेश्वर नमः
ॐ उमाकांत नमः
ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः
ॐ त्रिकालदर्शी नमः
ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः
ॐ महादेव नमः
ॐ गढ़शंकर नमः
ॐ मुक्तेश्वर नमः
ॐ नटेषर नमः
ॐ गिरजापति नमः
ॐ भद्रेश्वर नमः
ॐ त्रिपुनाशक नमः
ॐ निर्जेश्वर नमः
ॐ किरातेश्वर नमः
ॐ जागेश्वर नमः
ॐ अबधूतपति नमः
ॐ भीलपति नमः
ॐ जितनाथ नमः
ॐ वृषेश्वर नमः
ॐ भूतेश्वर नमः
ॐ बैजूनाथ नमः
ॐ नागेश्वर नमः


सोमवार से शुक्रवार तक

सोमवार- शिवजी
(ॐ नमः शिवाय १०८)
चंद्रदेव के मंत्र
ॐ भूर्भुव: स्व: अमृतांगाय विदमहे कलारूपाय धीमहि तन्नो सोमो प्रचोदयात्।


मंगलवार-हनुमान जी
(ॐ श्री हनुमते नमः १०८)
1.ॐ रूवीर्य समुद्भवाय नम:
2. ॐ शान्ताय नम:
3. ॐ तेजसे नम:
4. ॐ प्रसन्नात्मने नम:
5. ॐ शूराय नम:


बुधवार-गणेश जी
(ॐ श्री गणेशाय नमः १०८)
एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।


बृहस्पतिवार- विष्णु भगवान, बृहस्पति, और साईं बाबा
(ॐ नमो नारायणा १०८)
महालक्ष्मी च विद्महे,
विष्णुपत्नी च धीमहि,
तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात्।


शुक्रवार- मां दुर्गा
(ॐ श्री दुर्गाय नमः १०८)
ऊँ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम ।


शनिवार- शनि और हनुमान जी
(ॐ हनुमते नमः १०८)


रविवार- भगवान सूर्य, मां दुर्गा
(ॐ श्री दुर्गाय नमः १०८)
ॐ सुर्याय नमः


Monday, August 8, 2016

बिच्छू के जहर के लिए उपाय

* जानवरों के काटने व सांपबिच्छूजहरीले कीड़ों के काटे स्थान पर अपामार्ग के पत्तों और मूल का ताजा रस लगाने और पत्तों का रस चम्मच की मात्रा में बार पिलाने से विष का असर तुरंत घट जाता है और जलन तथा दर्द में आराम मिलता है।

1. पत्थर पर दो-चार बूँद पानी की डालकर उस पर निर्मली या इमली के बीज को घिसें। उस घिसे हुए पदार्थ को दर्दवाले स्थान पर लगायें एवं जहाँ बिच्छू ने डंक मारा हो वहाँ घिसा हुआ बीज चिपका दें। दो मिनट में ही बिच्छू का विष नष्ट हो जायेगा और रोता हुआ मनुष्य भी हँसने लगेगा।

2. पोटेशियम परमैंगनेट एवं नींबू के फूल (साइट्रिक एसिड) को बारीक पीसकर अलग-अलग बॉटल में भरकर रखें। बिच्छू के डंक पर मूँग के दाने जितने नींबू के फूल का पाउडर एवं पोटेशियम परमैंगनेट का मूँग के दाने जितना पाउडर रखें। ऊपर से एक बूँद पानी भी डालें। थोड़ी देर में उभार आकर विष उतर जायेगा। यह अदभुत दवा है।

3. 
एक पत्थर को अच्छे से साफ कर उस उस पर फिटकरी को अच्छे से घिसें। जहां पर बिच्छु ने काटा है उस जगह पर इस लेप को लगाऐं और आग से थोड़ा सेकें । कैसे भी बिच्छु का जहर हो इस विधि से जहर दो मिनिट में उतर जाएगा।

4. 
बारीक पिसा सेंधा नमक और प्याज को मिलाकर बिच्छु के काटे हुए स्थान पर लगाने से जहर उतर जाता है।

5. 
माचिस की पांच सात तीलियों का मसाला पानीमें घिसकर बिच्छु के डंक लगी जगह पर लगाऐं। इसे लगाते ही बिच्छु का जहर तुरंत उतर जाता है। 
विशेषजब किसी को बिच्छु काट ले तो तुरंत उस जगह को करी चार उंगल ऊपर से किसीकपड़े से या रस्सी से बांध देना चाहिए। ताकि उसका जहर जल्दी न फैले। इसके बाद किसी साफ सेफ्टी पिन या चिमटी को गर्म करके त्वचा में घुसे ड़ंक को निकाल देन चाहिए।


- एक पत्थर को अच्छे से साफ कर उस उस पर फिटकरी को अच्छे से घिसें। जहां पर बिच्छू ने काटा है उस जगह पर इस लेप को लगाऐं और आग से थोड़ा सेकें । कैसे भी बिच्छू का जहर हो इस विधि से जहर दो मिनिट में उतर जाएगा।

- बारीक पिसा सेंधा नमक और प्याज को मिलाकर बिच्छू के काटे हुए स्थान पर लगाने से जहर उतर जाता है।

- माचिस की पांच सात तीलियों का मसाला पानी में घिसकर बिच्छू के डंक लगी जगह पर लगाऐं। इसे लगाते ही बिच्छू का जहर तुरंत उतर जाता है।


बिच्छू के जहर के लिए मंत्र

बिच्छू के जहर के लिए मंत्र
 मंत्र ||
 नमो समुन्द्र।
समुन्द्र में कमल।
कमल में विषहर।
बिच्छू कहूं तेरी जात।
गरुड़ कहे मेरी अठारह जात।
छह काला।
छह कांवरा।
छह कूँ कूँ बान।
उतर रे उतर नहीं तो गरुड़ पंख हँकारे आन।
सर्वत्र बिसन मिलाई।
उतर रे बिच्छू उतर।
मेरी भक्ति।
गुरु कि शक्ति।
फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।

विधि: पहले १०८ बार मंत्र का जप करें।  फिर शुद्ध गंगा जल, समुन्द्र या किसी भी नदी का जल ले कर सात बार मंत्र जपकरते हुए झाड़ा लगा दें घाव पर हाथ रख कर। 












DISCLAIMER: *** : –1. मन्त्रों का प्रभाव और परिणाम हमेशा साधक के विश्वास व् श्रद्धा पर आधारित होता है।
2. E-BOOKS OR BLOG में जो भी मंत्र दिए गए है केवल सूचनार्थ ही है अन्यथा अगर साधना करनी है तो वो पूर्ण जानकार गुरु के निर्देशन में ही करने लाभदायक होंगे, किसी भी नुक्सान के लिए प्रकाशक व् लेखक जिम्मेदार नहीं होगा।
3. आगंतुक अगर ब्लॉग को नहीं देखना चाहता तो ही ईबूक्स खरीदे अन्यथा ब्लॉग पर ही सभी मंत्र दिए गए है।
4. मारण कर्म का प्रयोग तभी करना है जब आपके अपने प्राण संकट में हो और कोई भी रास्ता आपके बचने का न हो तब आप अपनी रक्षा के लिए इसका प्रयोग कर सकते है। अन्यथा इसका प्रयोग आपको पाप का भागीदार बना देगा ।