बिच्छू के जहर के लिए मंत्र
॥ मंत्र ||
ॐ नमो समुन्द्र।
समुन्द्र में कमल।
कमल में विषहर।
बिच्छू कहूं तेरी जात।
गरुड़ कहे मेरी अठारह जात।
छह काला।
छह कांवरा।
छह कूँ कूँ बान।
उतर रे उतर नहीं तो गरुड़ पंख हँकारे आन।
सर्वत्र बिसन मिलाई।
उतर रे बिच्छू उतर।
मेरी भक्ति।
गुरु कि शक्ति।
फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
विधि: पहले १०८ बार मंत्र का जप करें। फिर शुद्ध गंगा जल, समुन्द्र या किसी भी नदी का जल ले कर सात बार मंत्र जपकरते हुए झाड़ा लगा दें घाव पर हाथ रख कर।
DISCLAIMER: *** : –1. मन्त्रों का प्रभाव और परिणाम हमेशा साधक के विश्वास व् श्रद्धा पर आधारित होता है।
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