Monday, August 8, 2016

बिच्छू के जहर के लिए उपाय

* जानवरों के काटने व सांपबिच्छूजहरीले कीड़ों के काटे स्थान पर अपामार्ग के पत्तों और मूल का ताजा रस लगाने और पत्तों का रस चम्मच की मात्रा में बार पिलाने से विष का असर तुरंत घट जाता है और जलन तथा दर्द में आराम मिलता है।

1. पत्थर पर दो-चार बूँद पानी की डालकर उस पर निर्मली या इमली के बीज को घिसें। उस घिसे हुए पदार्थ को दर्दवाले स्थान पर लगायें एवं जहाँ बिच्छू ने डंक मारा हो वहाँ घिसा हुआ बीज चिपका दें। दो मिनट में ही बिच्छू का विष नष्ट हो जायेगा और रोता हुआ मनुष्य भी हँसने लगेगा।

2. पोटेशियम परमैंगनेट एवं नींबू के फूल (साइट्रिक एसिड) को बारीक पीसकर अलग-अलग बॉटल में भरकर रखें। बिच्छू के डंक पर मूँग के दाने जितने नींबू के फूल का पाउडर एवं पोटेशियम परमैंगनेट का मूँग के दाने जितना पाउडर रखें। ऊपर से एक बूँद पानी भी डालें। थोड़ी देर में उभार आकर विष उतर जायेगा। यह अदभुत दवा है।

3. 
एक पत्थर को अच्छे से साफ कर उस उस पर फिटकरी को अच्छे से घिसें। जहां पर बिच्छु ने काटा है उस जगह पर इस लेप को लगाऐं और आग से थोड़ा सेकें । कैसे भी बिच्छु का जहर हो इस विधि से जहर दो मिनिट में उतर जाएगा।

4. 
बारीक पिसा सेंधा नमक और प्याज को मिलाकर बिच्छु के काटे हुए स्थान पर लगाने से जहर उतर जाता है।

5. 
माचिस की पांच सात तीलियों का मसाला पानीमें घिसकर बिच्छु के डंक लगी जगह पर लगाऐं। इसे लगाते ही बिच्छु का जहर तुरंत उतर जाता है। 
विशेषजब किसी को बिच्छु काट ले तो तुरंत उस जगह को करी चार उंगल ऊपर से किसीकपड़े से या रस्सी से बांध देना चाहिए। ताकि उसका जहर जल्दी न फैले। इसके बाद किसी साफ सेफ्टी पिन या चिमटी को गर्म करके त्वचा में घुसे ड़ंक को निकाल देन चाहिए।


- एक पत्थर को अच्छे से साफ कर उस उस पर फिटकरी को अच्छे से घिसें। जहां पर बिच्छू ने काटा है उस जगह पर इस लेप को लगाऐं और आग से थोड़ा सेकें । कैसे भी बिच्छू का जहर हो इस विधि से जहर दो मिनिट में उतर जाएगा।

- बारीक पिसा सेंधा नमक और प्याज को मिलाकर बिच्छू के काटे हुए स्थान पर लगाने से जहर उतर जाता है।

- माचिस की पांच सात तीलियों का मसाला पानी में घिसकर बिच्छू के डंक लगी जगह पर लगाऐं। इसे लगाते ही बिच्छू का जहर तुरंत उतर जाता है।


बिच्छू के जहर के लिए मंत्र

बिच्छू के जहर के लिए मंत्र
 मंत्र ||
 नमो समुन्द्र।
समुन्द्र में कमल।
कमल में विषहर।
बिच्छू कहूं तेरी जात।
गरुड़ कहे मेरी अठारह जात।
छह काला।
छह कांवरा।
छह कूँ कूँ बान।
उतर रे उतर नहीं तो गरुड़ पंख हँकारे आन।
सर्वत्र बिसन मिलाई।
उतर रे बिच्छू उतर।
मेरी भक्ति।
गुरु कि शक्ति।
फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।

विधि: पहले १०८ बार मंत्र का जप करें।  फिर शुद्ध गंगा जल, समुन्द्र या किसी भी नदी का जल ले कर सात बार मंत्र जपकरते हुए झाड़ा लगा दें घाव पर हाथ रख कर। 












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4. मारण कर्म का प्रयोग तभी करना है जब आपके अपने प्राण संकट में हो और कोई भी रास्ता आपके बचने का न हो तब आप अपनी रक्षा के लिए इसका प्रयोग कर सकते है। अन्यथा इसका प्रयोग आपको पाप का भागीदार बना देगा ।